50+ (All Subjects) Micro Teaching Lesson Plan | सूक्ष्म शिक्षण का अर्थ, सिद्धान्त, उद्देश्य, विशेषताएँ, प्रकृति

50+ (All Subjects) Micro Teaching Lesson Plan

हेल्लो दोस्तों … आज हम यहाँ पर बीएड व डी एल एड में माइक्रो टीचिंग क्या होती है इसके बारें में पूरी जानकारी देने वाले है और साथ ही आप यहाँ से Micro Teaching Lesson Plan pdf download भी कर सकते है …

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सूक्ष्म शिक्षण का अर्थ, सिद्धान्त, उद्देश्य, विशेषताएँ, प्रकृति

माइक्रो-टीचिंग बी.एड. का एक महत्वपूर्ण घटक है। (बैचलर ऑफ एजुकेशन) कार्यक्रम, जहां इच्छुक शिक्षक नियंत्रित वातावरण में शिक्षण का अभ्यास करते हैं। यहां एक गाइड है कि बी.एड में सूक्ष्म-शिक्षण सत्र आम तौर पर कैसे आयोजित किए जाते हैं। कार्यक्रम:

1. **तैयारी:**

सूक्ष्म-शिक्षण सत्र से पहले, शिक्षक एक विशिष्ट विषय या अवधारणा के अनुरूप एक पाठ योजना तैयार करता है। पाठ योजना में उद्देश्य, शिक्षण रणनीतियाँ, आवश्यक सामग्री और मूल्यांकन विधियाँ शामिल हैं।

2. **सत्र सेटअप:**

सूक्ष्म-शिक्षण सत्र आम तौर पर कक्षा जैसी सेटिंग में होता है जिसमें साथियों या साथी छात्रों का एक छोटा समूह छात्रों के रूप में कार्य करता है। कमरा व्हाइटबोर्ड, प्रोजेक्टर या प्रॉप्स जैसी शिक्षण सामग्री से सुसज्जित हो सकता है।

3. **शिक्षण खंड:**

शिक्षक पाठ का एक छोटा खंड प्रस्तुत करता है, जो आम तौर पर 5 से 15 मिनट तक का होता है, जिसमें शिक्षण के एक विशिष्ट पहलू जैसे परिचय, स्पष्टीकरण, प्रश्नोत्तरी या समापन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।

4. **सहकर्मी अवलोकन:**

शिक्षण खंड के दौरान, सहकर्मी शिक्षक की शिक्षण शैली, संचार कौशल, कक्षा प्रबंधन, शिक्षण सहायता का उपयोग और छात्रों के साथ बातचीत का निरीक्षण करते हैं।

5. **प्रतिक्रिया:**

शिक्षण खंड के बाद, सहकर्मी अपनी टिप्पणियों के आधार पर शिक्षक को रचनात्मक प्रतिक्रिया प्रदान करते हैं। फीडबैक शक्तियों, सुधार के क्षेत्रों और शिक्षण प्रभावशीलता को बढ़ाने के सुझावों पर केंद्रित हो सकता है।

6. **चिंतन:**

शिक्षक प्राप्त फीडबैक पर विचार करता है, शक्तियों और सुधार के क्षेत्रों की पहचान करता है। चिंतन से शिक्षक को अपने शिक्षण अभ्यास में अंतर्दृष्टि प्राप्त करने और अपने शिक्षण कौशल को निखारने में मदद मिलती है।

7. **दोहराएँ चक्र:**

सूक्ष्म-शिक्षण प्रक्रिया को अक्सर कई बार दोहराया जाता है, जिससे शिक्षक को विभिन्न विषयों को पढ़ाने का अभ्यास करने, प्रतिक्रिया प्राप्त करने और अपनी शिक्षण तकनीकों को परिष्कृत करने की अनुमति मिलती है।

8. **आकलन:**

सूक्ष्म-शिक्षण सत्रों का मूल्यांकन पाठ योजना, शिक्षण वितरण, छात्र सहभागिता और कक्षा प्रबंधन जैसे पूर्व निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जा सकता है। मूल्यांकन वास्तविक कक्षा शिक्षण के लिए शिक्षक की तैयारी का मूल्यांकन करने में मदद करता है।

सूक्ष्म-शिक्षण इच्छुक शिक्षकों को व्यावहारिक शिक्षण अनुभव प्राप्त करने, प्रतिक्रिया प्राप्त करने और सहायक वातावरण में अपने शिक्षण कौशल को निखारने का एक मूल्यवान अवसर प्रदान करता है। यह शिक्षण पेशे की चुनौतियों और जिम्मेदारियों के लिए भावी शिक्षकों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


Microteaching Lesson plan for English

माइक्रो टीचिंग में कितने कौशल होते हैं?

माइक्रो टीचिंग में कई प्रमुख कौशल होते हैं जो एक शिक्षक को सिखाने और शिक्षण करने के लिए आवश्यक होते हैं। ये कौशल शिक्षक की प्रभावी शिक्षण क्षमता को विकसित करने में मदद करते हैं। यहां कुछ मुख्य कौशलों की सूची है:

1. **विषय ज्ञान (Subject Knowledge):**

शिक्षक को अपने विषय के गहरे ज्ञान की होनी चाहिए।

2. **शिक्षण योजना (Lesson Planning):**

शिक्षक को शिक्षण योजना तैयार करने की क्षमता होनी चाहिए, जिसमें उचित विषय समझाने की प्रक्रिया और शिक्षण सामग्री शामिल हो।

3. **शिक्षण विधियाँ (Teaching Methods):**

विभिन्न शिक्षण विधियों को समझने और उन्हें सकारात्मक रूप से अपनाने की क्षमता।

4. **व्यावसायिक अवगति (Professional Awareness):**

शिक्षक को व्यावसायिक अवगति होनी चाहिए, जैसे कि छात्रों की आवश्यकताओं को समझने, समय प्रबंधन और सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य से शिक्षण करने की क्षमता।

5. **व्यक्तिगत गुण (Personal Qualities):**

शिक्षक को संवेदनशीलता, संप्रेम, संवेदनशीलता और सहानुभूति जैसी व्यक्तिगत गुणों की होनी चाहिए।

6. **संचार कौशल (Communication Skills):**

शिक्षक को स्पष्ट और प्रभावी संचार करने की क्षमता होनी चाहिए, जो छात्रों को समझने और सही दिशा में ले जाने में मदद करेगी।

7. **शिक्षण उपकरणों का प्रयोग (Use of Teaching Aids):**

विभिन्न शिक्षण सहायक साधनों का प्रयोग करने की क्षमता, जैसे कि छायाचित्र, मॉडल, और प्रोजेक्टर।

8. **कक्षा प्रबंधन (Classroom Management):**

कक्षा में शांति और अनुशासन का बनाए रखने की क्षमता।

9. **मूल्यांकन (Assessment):**

छात्रों की प्रगति का मूल्यांकन करने की क्षमता, जैसे कि प्रश्नोत्तरी, परीक्षण, और मूल्यांकन।

इन कौशलों का संयोजन शिक्षक को एक सशक्त और प्रभावी शिक्षक बनाने में मदद करता है। इसके अलावा, विभिन्न शिक्षण संस्थानों और कक्षाओं के अनुसार अन्य कौशल भी शामिल हो सकते हैं।


माइक्रो टीचिंग में कितने स्टूडेंट होते हैं?

माइक्रो टीचिंग सत्र में सामान्य रूप से 5 से 10 छात्र होते हैं। यह एक छोटे समूह में शिक्षण का प्रदर्शन करने का एक प्रकार है, जिसमें छात्र अन्य छात्रों को शिक्षण प्रक्रिया में सहायक रूप में शामिल होते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को शिक्षण कौशल में सुधार करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना होता है और छात्रों को अधिक सकारात्मक शिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाने का अवसर प्रदान करना होता है। छात्रों की संख्या संयोजन और शिक्षण संस्थान की नीतियों के आधार पर विभिन्न हो सकती है।


माइक्रो टीचिंग की शुरुआत कब हुई थी?

माइक्रो टीचिंग की शुरुआत 1963 में वेस्टर्न मिचिगन यूनिवर्सिटी के शिक्षण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डेविड पैर्कर द्वारा की गई थी। उन्होंने छोटे समूहों में शिक्षण का प्रयोग करके शिक्षकों की प्रशिक्षण प्रक्रिया में सुधार करने की प्रक्रिया शुरू की थी। यह प्रक्रिया बाद में विभिन्न शिक्षा संस्थानों द्वारा अपनाई गई और वर्तमान में शिक्षाकों की प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भाग बन गई है।


मैं माइक्रो टीच की तैयारी कैसे करूं?

माइक्रो टीच की तैयारी करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

1. **विषय का चयन:** सबसे पहले, आपको शिक्षण प्रदर्शन करने के लिए एक विषय चुनना होगा। यह विषय आपके विषय या कक्षा के अनुसार हो सकता है।

2. **पाठ योजना तैयार करें:** अपने चुने गए विषय के लिए एक पाठ योजना तैयार करें। यह योजना आपको अपने पाठ के उद्देश्य, विषय, शिक्षण विधियाँ, और मूल्यांकन के बारे में स्पष्टता देगी।

3. **शिक्षण सामग्री तैयार करें:** अपने पाठ के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री जैसे कि प्रेजेंटेशन, छवियाँ, मॉडल्स, और अन्य साधनों को तैयार करें।

4. **अभ्यास करें:** अपने पाठ की अभ्यास करें ताकि आप पाठ को सही तरीके से प्रस्तुत कर सकें और समय की अच्छी तरह से प्रबंधन कर सकें।

5. **माइक्रो टीच के लिए तैयार हों:** माइक्रो टीच के लिए तैयार होने के लिए, अपने दोस्तों, परिवार के सदस्यों या अन्य छात्रों के सामने अपना पाठ प्रदर्शन करें।

6. **समीक्षा और प्रतिक्रिया प्राप्त करें:** अपने प्रदर्शन के बाद, समीक्षा और प्रतिक्रिया प्राप्त करें, जिससे आप अपने शिक्षण कौशल में सुधार कर सकें।

7. **स्वीकृति प्राप्त करें:** अगर आपका प्रदर्शन सफल होता है, तो अपने शिक्षण अध्ययन के आधार पर स्वीकृति प्राप्त करें।

माइक्रो टीचिंग की तैयारी के लिए यह चरण अपनाएं और अपने शिक्षण कौशल को सुधारें।


सूक्ष्म शिक्षण में कितने चरण होते हैं?

सूक्ष्म शिक्षण में सामान्य रूप से चार प्रमुख चरण होते हैं:

1. योजना और तैयारी:

यह चरण शिक्षण प्रदर्शन की योजना और तैयारी के लिए होता है। शिक्षक अपने चुने गए विषय के लिए एक उचित पाठ योजना तैयार करता है और शिक्षण सामग्री, शिक्षण विधियाँ, और मूल्यांकन की योजना बनाता है।

2. प्रदर्शन और प्रतिक्रिया:

इस चरण में, शिक्षक अपने तैयार किए गए पाठ को छात्रों के सामने प्रदर्शित करता है। छात्रों की प्रतिक्रिया को ध्यान में रखते हुए, शिक्षक अपने प्रदर्शन को सुधारता है और अधिक सकारात्मक प्रभाव प्राप्त करने का प्रयास करता है।

3. समीक्षा और संशोधन:

इस चरण में, शिक्षक अपने प्रदर्शन को समीक्षा करता है और प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर आवश्यक संशोधन करता है। उसे अपने प्रदर्शन में सुधार की आवश्यकता होती है ताकि वह अगली बार बेहतर प्रदर्शन कर सके।

4. स्वीकृति और पुनरावलोकन:

अंतिम चरण में, शिक्षक अपने प्रदर्शन की स्वीकृति प्राप्त करता है और अपने प्रदर्शन को पुनः आवलोकन करता है। यहां वह अपने प्रदर्शन के सकारात्मक पहलुओं को बढ़ावा देता है और अपने अधिक उत्कृष्ट बनाने का प्रयास करता है।

ये चार चरण सूक्ष्म शिक्षण की प्रमुख दिशानिर्देश होते हैं, जिन्हें शिक्षक अपने शिक्षण प्रदर्शन को एक संवेदनशील और प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए अनुसरण करता है।


सूक्ष्म शिक्षण विधि का जनक कौन है?

सूक्ष्म शिक्षण विधि का जनक विश्वविख्यात शिक्षाशास्त्री और शिक्षा विज्ञानी डॉ. डेविड पैर्कर हैं। उन्होंने 1963 में वेस्टर्न मिचिगन यूनिवर्सिटी के शिक्षण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर के रूप में अपने अनुसंधान के दौरान माइक्रो टीचिंग की विकसित की। उन्होंने छोटे समूहों में शिक्षण का प्रदर्शन करने के लिए इस विधि को विकसित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के शिक्षण कौशल को सुधारना और उन्हें अधिक प्रभावी बनाना था। उनके अनुसार, सूक्ष्म शिक्षण विधि का उद्देश्य शिक्षक को छोटे समूहों में शिक्षण प्रदर्शन करने का अवसर प्रदान करना था, ताकि वह अपने शिक्षण कौशल को संदर्भित करने के लिए प्रतिक्रिया प्राप्त कर सके।

सूक्ष्म शिक्षण के गुण और दोष क्या हैं?

सूक्ष्म शिक्षण के गुण और दोष निम्नलिखित हैं:

सूक्ष्म शिक्षण के गुण –

1. प्रभावशाली प्रशिक्षण: सूक्ष्म शिक्षण शिक्षकों को प्रभावी शिक्षण कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।

2. संवेदनशीलता: यह शिक्षकों को छात्रों के संबंध में संवेदनशील बनाता है, जिससे वे उनकी जरूरतों को समझते हैं और उन्हें बेहतर तरीके से सहायता प्रदान कर सकते हैं।

3. समृद्ध अनुभव: यह शिक्षकों को विभिन्न शिक्षण प्रदर्शनों का अनुभव प्राप्त करने का मौका देता है, जो उनके शिक्षण कौशल को समृद्ध करता है।

4. प्रतिक्रिया और संशोधन: यह शिक्षकों को अपने प्रदर्शन की प्रतिक्रिया प्राप्त करने और उसे संशोधित करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे वे अपने शिक्षण कौशल में सुधार कर सकते हैं।

 

सूक्ष्म शिक्षण के दोष-

1. समय की अभाव: सूक्ष्म शिक्षण को व्यावसायिक तैयारी और प्रदर्शन की मांग के कारण कभी-कभी समय की कमी होती है।

2. संवेदनशीलता का अभाव: कुछ छात्रों की संवेदनशीलता और प्रतिक्रिया की कमी हो सकती है, जिससे प्रदर्शन के लिए समूह उत्तेजित नहीं होता है।

3. प्रतिक्रिया की कमी:- कई बार, प्रदर्शन के बाद प्रतिक्रिया की कमी होती है, जिससे शिक्षक अपने शिक्षण कौशलों को संशोधित करने के लिए उपयुक्त प्रतिक्रिया नहीं प्राप्त करता है।

4. संवेदनाहीनता:- कभी-कभी, छात्रों या शिक्षकों के बीच विद्यमान संवेदनाहीनता के कारण, शिक्षण प्रक्रिया में संघर्ष हो सकता है और प्रदर्शन की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ सकता है।


 

 

 

 

 


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